झारखंड : आदिवासी बुजुर्ग की मौत- बैंक गेट के सामने दफनाने की मांग, केवाईसी के नाम पर नहीं दिया पेंशन का पैसा

Garhwa-Bank-Tragedy-Death

गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले के बड़गड़ से बेहद झकझोर देने वाली खबर आई है। 75 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग रतन लकड़ा की सिर्फ इसलिए मौत हो गई क्योंकि बैंक में केवाईसी के नाम पर महीनों चक्कर कटवाए गए और इलाज के लिए उनकी ही पेंशन का पैसा नहीं मिला।

मौत के बाद परिजन और स्थानीय लोग शव को बैंक शाखा के मुख्य द्वार पर रखकर प्रदर्शन कर रहे हैं और बैंक शाखा के सामने ही शव को दफन करने का फैसला लिया है। स्थानीय लोगों ने बैंकिंग सिस्टम की इस कथित लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच की मांग की हैं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

शीघ्र जांच कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश : सीएम हेमंत सोरेन ने मामला सामने आने के बाद गढ़वा डीसी को मामले की शीघ्र जांच कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया हैं। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के बाद सूचना देने का आदेश दिया है।

पेंशन की राशि मौजूद होने पर भी पैसा निकाल नहीं पाये बुजुर्ग : परिजनों का आरोप है कि गढ़वा जिले के बड़गड़ ब्रांच वाले ग्रामीण बैंक में इलाज के लिए मृतक के खाते में पेंशन की राशि मौजूद होने के बावजूद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण समय पर पैसे नहीं मिल सके और इलाज के अभाव में रतन लकड़ा की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव को लेकर झारखंड ग्रामीण बैंक पहुंचे और धरने पर बैठ गए। वह कॉफिन में शव लेकर बैंक के गेट पर बैठ गए हैं।

एसडीएम रंका और एलडीएम को शीघ्र विस्तृत जांच के निर्देश : मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम रंका और एलडीएम को शीघ्र विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांचोपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जायेगी। नियमानुसार रतन लकड़ा के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बैंक ने 3 महीने तक ई-केवाईसी के नाम पर चक्कर कटवाए : परिजनों का कहना है कि बैंक मैनेजर ने उन्हें करीब 3 महीने तक ई-केवाईसी के नाम पर चक्कर कटवाए। उनका आरोप है कि रीजनल मैनेजर के निर्देश पर वे अपने मरणासन्न पिता को बैंक लेकर पहुंचे जहां ई-केवाईसी की प्रक्रिया तो पूरी कर दी गई, लेकिन इसके बाद भी खाते से पैसे निकालने के लिए उन्हें लगातार दौड़ाया गया और राशि नहीं दी गई।