नई दिल्ली : नेपाल अब बदला-बदला नजर आ रहा है. सरकार बदलने के बाद पीएम बालेन शाह ने विवादित नक्शे वाले सिक्कों को चलन से बाहर कर नए सिक्के जारी करने का फैसला किया है, जिसे दोनों मुल्कों में रिश्ते सुधरने का प्रतीक माना जा रहा है. अब भारत ने भी नेपाल के प्रति उदारता दिखाते हुए सीधी रेल कार्गो सेवा शुरू कर दी है.
कोलकाता से नेपाल पहुंची पहली मालवाहक ट्रेन : भारत के कोलकाता बंदरगाह से कैनोला (सरसों की एक प्रजाति) के दानों से भरी मालगाड़ी नेपाल के विराटनगर पहुंची. यह इस तरह की ट्रेन की पहली सीधी व्यावसायिक यात्रा थी, जिसे नेपाल की तरक्की के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच अपग्रेड किए गए सीमा पार रेल ट्रांजिट नियमों को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 40 डिब्बों वाली यह मालगाड़ी कोलकाता बंदरगाह से शुरू होकर सोमवार को नेपाल के विराटनगर स्थित ‘नेपाल कस्टम्स यार्ड’ (NCY) पहुंची. एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत ने यह विशेष मालगाड़ी चलाकर नेपाल के लिए तरक्की का सुनहरा रास्ता खोल दिया है. इस पहल से न केवल नेपाल का व्यापार तेजी से बढ़ेगा, बल्कि उसकी लॉजिस्टिक लागत कम होगी और देश में नए रोजगारों का सृजन भी बढ़ेगा.
नेपाल की तरक्की के लिए भारत ने खोल दिया दिल : बताते चलें कि भारत के जोगबनी और नेपाल के विराटनगर के बीच ब्रॉड-गेज रेल लिंक का उद्घाटन जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने किया था. पूरी तरह से भारत सरकार के अनुदान से तैयार इस रेल लाइन का निर्माण नेपाल-भारत के सामान को तेज और सस्ते तरीके से बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए किया गया है.
शुरुआत में भारत-नेपाल पारगमन संधि की सीमाओं के कारण इसके व्यावसायिक परिचालन में कुछ अड़चनें थीं, जिनमें बाद में बदलाव किए गए. लंबे समय तक चली कूटनीतिक बातचीत के बाद, दोनों पक्षों ने 13 नवंबर 2025 को ‘लेटर ऑफ एक्सचेंज’ (LoE) पर हस्ताक्षर करके इस प्रोटोकॉल में संशोधन किया.
दुनिया के देशों से सामान मंगवा सकेगा नेपाल : इस समझौते के तहत कोलकाता और विशाखापट्टनम के बंदरगाहों से सीधे नेपाल के भीतर निर्धारित स्थानों तक कंटेनर और बल्क कार्गो के सीधे रेल परिवहन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इनमें बिराटनगर कस्टम्स यार्ड सबसे अहम है. इस समझौते में नेपाल को भारत की ओर से बनाए गए बुनियादी ढांचे का ज्यादा इस्तेमाल करने की छूट भी दी गई.
बताते चलें कि अब तक नेपाल जाने वाले सामानों को बंदरगाह पर उतारकर ट्रकों के जरिए भेजा जाता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते थे. लेकिन सोमवार को आई पहली मालवाहक ट्रेन ने अब इस रुकावट को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है.
कम खर्च में अब दुनिया से कर सकेगा व्यापार : इस ट्रेन के आगमन को नेपाल की बाकी दुनिया से कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. इससे नेपाली आयातकों और निर्यातकों के लिए परिवहन लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है, जो लंबे समय से भारतीय बंदरगाहों और सड़क नेटवर्क पर निर्भर रहे हैं. इससे उन्हें माल मंगाने या बाहर भेजने में काफी समय लग जाता था, जिससे उन्हें परेशानियां झेलनी पड़ रही थीं.
