झारखंड : बोकारो के बेरमो में तेज आवाज के साथ सड़क धंसी, आवाजाही बंद; भूमिगत आग ने बढ़ाई चिंता

Bokaro-Bermo-Road-Damage

बोकारो : झारखंड में बोकारो जिले के बेरमो कोयलांचल स्थित पांच नंबर धौड़ा क्षेत्र में रहना इन दिनों लोगों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है। शुक्रवार को अचानक तेज आवाज हुई और सड़क किनारे की जमीन धंस गई। आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए, बच्चों को गोद में उठाकर माताएं सड़क पर भाग अपनी जान बचाई। इस दौरान बुजुर्गों की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।

सड़क किनारे जमीन के नीचे धधक रही आग : हर किसी के मन में एक ही सवाल था, अगर अगली बार जमीन उनके घर के नीचे धंस गई तो क्या होगा? जिस जगह जमीन धंसी है, वहां से कुछ ही दूरी पर सैकड़ों परिवार रहते हैं। सबसे भयावह बात यह है कि सड़क के दोनों ओर जमीन के नीचे आग धधक रही है। कई जगहों से धुआं निकलता देखा जा सकता है।

इलाके के लिए जीवन रेखा है ट्रांसपोर्टिंग सड़क : बेरमो कोयलांचल स्थित पांच नंबर धौड़ा क्षेत्र में जिस स्थान पर भू-धंसान हुआ है, उसके समीप सीसीएल की महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्टिंग सड़क है, जिसे क्षेत्र की जीवन रेखा माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन कोयला परिवहन होता है। ऐसे में आग और धंसान का खतरा केवल स्थानीय आबादी ही नहीं बल्कि औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी चुनौती बनकर सामने आया है।

घटना के बा सीसीएल ढोरी प्रबंधन वैकल्पिक सड़क और आग से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन किया जा रहा है।ढोरी प्रक्षेत्र के महाप्रबंधक रंजन सिन्हा ने कहा तत्काल वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है। वहीं भू धंसान वाले क्षेत्र में बसे लोगों के लिए भी समुचित व्यवस्था की जाएगी।

कभी झरिया की भूमिगत आग देशभर की सुर्खियां बनती थी। आज बेरमो की धरती भी धुएं के साथ वही संदेश दे रही है। आग चाहे कहीं भी हो, उसे नजरअंदाज करने की कीमत हमेशा भारी पड़ती है। आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आग का दायरा बढ़ता रहा और भू धंसान की घटनाएं जारी रहीं तो इस घनी आबादी का भविष्य क्या होगा? क्या किसी बड़े हादसे से पहले स्थायी समाधान निकलेगा या फिर खतरे की यह चेतावनी भी समय के साथ फाइलों में दब जाएगी।