चतरा : झारखंड के चतरा जिले में गिद्धौर प्रखंड के मनार ईंचाक क्षेत्र में संचालित राज श्री कंस्ट्रक्शन की पत्थर खदान अब बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने खदान संचालन में भारी अनियमितता, नियमों की अनदेखी और पर्यावरणीय मानकों के खुले उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।
हालांकि ग्रामीणों ने पत्थर खदान का विरोध खोलने की प्रक्रिया से पहले काफी विरोध किया पर पत्थर कारोबारियों के आगे एक नहीं चली । ग्रामीणों का कहना है कि खदान को निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक पत्थर बिना चालान निकाला जा रहा है और प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदे बैठा है। जानकारी के अनुसार खदान को प्रतिदिन लगभग 200 टन पत्थर उत्पादन की अनुमति प्राप्त है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिदिन दर्जनों हाईवा के माध्यम से भारी मात्रा में पत्थर बाहर भेजा जा रहा है।
ब्लास्ट से दहल रहे गांव, घरों में पड़ रही दरार : ग्रामीणों के मुताबिक खदान में प्रतिदिन की जा रही हैवी ब्लास्टिंग से पूरा इलाका दहशत में है। विस्फोट के दौरान धरती कांपने जैसी स्थिति बन जाती है। कई ग्रामीणों ने दावा किया है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण उनके घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि कुछ मकान क्षतिग्रस्त भी हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सीटीओ है, लेकिन वैधता पर उठ रहे सवाल : खनन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खदान को वर्ष 2027 तक सीटीओ (Consent to Operate) प्राप्त है। इसके बावजूद खदान संचालन की प्रक्रिया और वैधानिक अनुमति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च न्यायालय द्वारा तय दिशा-निर्देशों और आवश्यक शर्तों का पालन किए बिना ही खदान संचालन की अनुमति दे दी गई।
धूल, प्रदूषण और जर्जर सड़कें बनीं ग्रामीणों की मुसीबत : भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से गांव की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। उड़ती धूल और प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। खेतों की उपज प्रभावित हो रही है, वहीं लोगों को सांस और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और उपायुक्त स्वयं गांव पहुंचकर हालात देखें, तो क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वास्तविक उत्पादन क्षमता की जांच, ब्लास्टिंग की वैधता की समीक्षा और पर्यावरणीय मानकों के पालन की जांच की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खनन किसके संरक्षण में चल रहा है और क्या संबंधित विभागों ने सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया था या नहीं? पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और ग्रामीण अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
