नई दिल्ली : पाकिस्तान ने भारत को छलनी करने के लिए जिस आतंकवाद को अपनी अहम रणनीति बनाया था. अब वही उसे धीरे-धीरे अंदर से खा रहा है. उसके पाले हुए आतंकियों की पिछले कुछ सालों में चुन-चुनकर हत्याएं हो रही हैं. कोई एक या दो अज्ञात बंदूकधारी आते हैं और पाकिस्तान में छुपे आतंकियों पर गोली बरसाकर उन्हें 72 हूरों के पास भेज देते हैं. अब बंदूकधारियों ने पाकिस्तान में एक और आतंकी को टपका दिया है.
मौलाना शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या : रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सीनियर कमांडर मौलाना शेख यूसुफ अफरीदी को अचानक घेरकर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी. हमलावरों ने उन्हें बचने का कोई मौका नहीं दिया और कई गोलियां उनके शरीर में उतारकर मौके पर ही मार डाला. अटैक के बाद हमलावर पहाड़ी इलाके में गायब हो गए. अभी तक किसी भी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है. सुरक्षा एजेंसियों ने इसे टारगेट किलिंग बताते हुए जांच शुरू कर दी है.
अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा के जिस आतंकी शेख यूसुफ अफरीदी को मारा, वह खैबर क्षेत्र के जखा खेल कबीले का रहने वाला था. वह पश्तूनों की एक शाखा अफरीदी का हिस्सा था. वह इस्लाम में सबसे कट्टर कही जाने वाली अहले-हदीस (सलाफी) विचारधारा को मानने वाला मौलाना था.
खैबर पख्तूनख्वा में था संगठन का ब्रांच हेड : शेख यूसुफ अफरीदी लश्कर-ए-तैयबा में प्रांतीय स्तर पर सबसे प्रभावशाली कमांडर था. वह खैबर पख्तूनख्वा में संगठन का ब्रांच हेड था. लश्कर सुप्रीमो हाफिज मोहम्मद सईद का वह खासमखास था. भारत के खिलाफ हमलों की प्लानिंग में उसकी अहम भूमिका रहती थी. वह न केवल पाकिस्तान में युवाओं को जिहाद के लिए तैयार करता था बल्कि उन्हें ट्रेनिंग देकर जम्मू कश्मीर में हमले के लिए भेजता था.
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अफरीदी का मुख्य काम क्षेत्रीय नेटवर्क का संचालन, युवाओं की भर्ती, मजहबी प्रचार और जिहादियों में आपसी समन्वय बनाए रखना था. वह ISIS की ओर से भी लड़ाकों की भर्ती में भी सक्रिय बताया गया था. चूंकि वह सलाफी विचारधारा का मानने वाला था और उसका बैकग्राउंड कबायली था, इसलिए भारत के खिलाफ आतंकी हमले में वह LeT के लिए आदर्श चेहरा बन गया था.
जम्मू-कश्मीर में हुए हमलों में था हाथ : जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर हुए हमलों में उसका हाथ शामिल माना जाता है. वह स्थानीय मदरसों, मस्जिदों और कबीलाई नेटवर्क के जरिए लश्कर को मजबूत करने में लगा था. उसकी हत्या से LeT का खैबर पख्तूनख्वा नेटवर्क कमजोर होने की आशंका है. हाफिज सईद के सर्कल में यह दूसरा बड़ा झटका है.
यह हत्या 2026 की शुरुआत से LeT और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे समूहों के 30 से ज्यादा उच्च पदाधिकारियों पर हो रहे हमलों का हिस्सा है. लाहौर, कराची, पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों की चुप्पी और कोई जिम्मेदारी न लेने से अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह आंतरिक झगड़े, प्रतिद्वंद्वी गुटों या गुप्त अभियानों का नतीजा हो सकता है.
पाकिस्तानी आतंकियों को कौन मार रहा? : अफरीदी की मौत से LeT का खैबर पख्तूनख्वा नेटवर्क कमजोर होने की आशंका है. हाफिज सईद के लिए यह एक और बड़ा झटका मान रहा है. इसके साथ ही पाकिस्तान में आतंकवादियों को अब अपनी जान के लाले भी पड़ रहे हैं. LeT और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी गुटों पर 30 से ज्यादा हमले हो चुके हैं. ये अटैक कौन कर रहा है, इस बारे में अभी तक कुछ भी क्लियर नहीं हो पाए हैं. अटकलों के मुताबिक, यह उनके आंतरिक झगड़ों, प्रतिद्वंद्वी गुटों में संघर्ष या किसी कोवर्ट ऑपरेशन का नतीजा हो सकता है.
