रांची : भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव ने कहा है कि बिना ग्राम सभा के अनुमति के ‘ चंगाई सभा ‘ नहीं की जा सकती है। निशा उरांव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में भी ये स्पष्ट किया गया है की ग्राम सभा ‘चंगाई सभा’ को रोक सकती है। निशा उरांव लोहरदगा में उपायुक्त को ज्ञापन देने के बाद कहा कि जिला प्रशासन बिना ग्राम सभा की अनुमति के चंगाई सभा की अनुमति न दे। आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि ग्राम सभा में निर्णय ‘सर्वसम्मति’ से लिया जाता है, यानी अगर ग्राम सभा के 5-10 लोग भी अगर विरोध करते हैं, तो चंगाई सभा नहीं की जा सकती है।
‘मॉडल ग्राम सभा’ पेसा कानून की मूल भावना के विपरीत : निशा उरांव ने पारंपरिक ग्राम सभाओं, रूढ़िजन्य कानूनों तथा धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिले में ‘मॉडल ग्राम सभा’ के नाम पर ऐसी नई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जो आदिवासी समाज की पारंपरिक ग्राम सभा व्यवस्था और पेसा कानून की मूल भावना के विपरीत हैं। संगठन ने मांग की कि केवल ग्राम प्रधान, हातु मुंडा, महतो, पाहन और पाइनभरा जैसे पारंपरिक पदों वाली ग्राम सभाओं को ही मान्यता दी जाए।
धर्मांतरित आदिवासियों के पारंपरिक पदों पर बने रहने पर सवाल : आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने धर्मांतरित आदिवासियों के धार्मिक और पारंपरिक पदों पर बने रहने पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कि ग्राम प्रधान, पाहन, महतो और पड़हा राजा जैसे पद धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं, इसलिए पारंपरिक आदिवासी आस्था का पालन नहीं करने वाले धर्मांतरित व्यक्तियों को इन पदों पर नहीं रखा जाना चाहिए।
धर्म परिवर्तन के बाद भुईहरी और पहनाई भूमि : निशा उरांव ने भुईहरी और पहनाई भूमि के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद पारंपरिक पदों से जुड़ी ऐसी भूमि पर अधिकार समाप्त माना जाना चाहिए और उसे पुनः ग्राम सभा के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए। उन्होंने गैर-पारंपरिक पड़हा संगठनों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। निशा उरांव ने प्रशासन से मांग की कि धनबल या अन्य माध्यमों से गठित ऐसे संगठनों को सरकारी अथवा कानूनी मान्यता नहीं दी जाए।
निशा उरांव ने जिला प्रशासन से पेसा नियमावली के अनुरूप सभी प्रक्रियाओं में पारंपरिक आदिवासी पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा आदिवासी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।
क्या है ‘चंगाई सभा’? : ‘चंगाई सभा’ एक धार्मिक प्रार्थना सभा है, जिसका आयोजन मुख्य रूप से ईसाई समुदाय और कुछ अन्य मसीही संगठनों की ओर से किया जाता है। ‘चंगाई’ शब्द का अर्थ है उपचार या स्वस्थ होना। इस सभा का मुख्य उद्देश्य यीशु की प्रार्थना के माध्यम से लोगों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बीमारियों को दूर करना और उन्हें छुटकारा दिलाना होता है। चंगाई सभा में पास्टर या धर्मगुरु बीमार लोगों के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं, बाइबल के वचन पढ़ते हैं और विश्वास दिलाते हैं कि परमेश्वर की शक्ति के असाध्य रोग भी ठीक हो सकते हैं। चमत्कार की उम्मीद में इन सभाओं में लोग इकट्ठा होते हैं।
