कोलकाता : पश्चिम बंगाल में बुधवार को टीएमसी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी को सबसे बड़ा झटका दे दिया। दो बार के राज्यसभा सांसद और अब विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी 58 बागी विधायकों के साथ विधानसभा में नेता विपक्ष के लिए दावा स्पीकर को सौंपा है।
ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि उनका गुट ही असली टीएमसी है। बनर्जी की बगावत में टीएमसी के मुस्लिम विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल है कि ममता बनर्जी अब क्या करेंगी? ऋतब्रत बनर्जी ने खेमे के चीफ व्हिप का भी ऐलान कर दिया है। ममता खेमे के नेताओं का कहना है ममता बनर्जी ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। इधर, ऋतब्रत बनर्जी ने ऐलान किया है कि हम ममता बनर्जी को चिट्ठी लिखकर 18वीं बंगाल विधानसभा में टीएमसी विधायक दल का मुख्य सलाहकार बनने का प्रस्ताव देंगे।
मैं हूं विधानसभा में नेता विपक्ष-ऋतब्रत बनर्जी : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निष्कासित और पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी (47) ने दावा किया है कि विधानसभा के स्पीकर ने उनके गुट को मुख्य विपक्षी दल के तौर पर स्वीकार कर लिया है और उन्हें नेता प्रतिपक्ष की मंजूरी दे दी है, हालांकि इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय से कोई बयान सामने नहीं है।
इससे पहले ममता बनर्जी ने शोभनदेव बंधोपाध्याय को नेता विपक्ष बनाया था। अब ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि हम ‘मैं’ में नहीं ‘हम’ में विश्वास रखते हैं। वे विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि बागी गुट द्वारा बनाए गए हर नियम का पालन किया गया है, और इसी वजह से उन्हें मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्वीकार किया गया है। बनर्जी ने ममता बनर्जी से अनुरोध किया कि वे उनके विधायक दल की प्रधान परामर्शदाता (मुख्य सलाहकार) के रूप में बनी रहें। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में वे विधानसभा के भीतर एक सकारात्मक और रचनात्मक विरोधी दल की भूमिका निभाएंगे।
अभिषेक बनर्जी की कोई भूमिका ही नहीं रहेगी। उनके साथ हमारी पार्टी का कोई संबंध नहीं है। उनके साथ हमारी आवाम का भी दूर-दूर कोई संबंध नहीं है। अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते बल्कि बाहर निकलकर आते। जैसे चोरों को पीटा जाता है वैसे उन्हें पीटा गया। फिर देखा गया कि उन्होंने केंद्र सरकार को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए पत्र दिया। -निष्कासित TMC नेता ऋतब्रत बनर्जी
3 जून को पश्चिम बंगाल में क्या कुछ हुआ? :
- 59 बागी विधायकों की बैठक : यह बैठक विधानसभा के ‘नौशाद अली कक्ष’ में हुई। इसमें टीएमसी के 59 बागी विधायक पहुंचे। एक गुप्त बैठक के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया।
- ऋतब्रत बनर्जी बने नेता : बागियों ने पार्टी के विधायक दल पर नियंत्रण का दावा करते हुए निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया है।
- अभिषेक बनर्जी पर हमला : ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती दी। आरोप लगाया कि पार्टी को कॉरपोरेट मैनेजमेंट के स्टाइल में चलाया जा रहा है और राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई-पैक (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भरता है।
- फिरहाद हकीम का इस्तीफा : ममता बनर्जी के बेहद करीबी सहयोगी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
ममता बनर्जी का मतलब ही टीएमसी-कुणाल घोष : तृणमूल कांग्रेस में चल रही उठापठक के बीच कोलकाता में ममता बनर्जी के आवास पर एक बैठक हुई। इसके बाद पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी और ममता बनर्जी का मतलब ही टीएमसी है। सभी कार्यकर्ता दीदी के साथ खड़े हैं। कुछ लोगों ने टीएमसी के चुनाव चिह्न पर और दीदी की तस्वीर का इस्तेमाल करके चुनाव जीता, लेकिन अब वे दूसरे खेमे के जाल में फंस रहे हैं। ये लोग निर्दलीय नहीं हैं, ये टीएमसी के ही हैं।
वे कहते हैं कि वे ममता दीदी का सम्मान करते हैं, लेकिन अगर वे ऐसा करते हैं, तो वे शोभनदेव चट्टोपाध्याय को स्वीकार क्यों नहीं कर पाते? 2026 विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। 58 विधायकों के अलग गुट बनाने से ममता बनर्जी के पास कम विधायक बचे हैं।
