कोलकाता : पश्चिम बंगाल चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद बगावत से जूझ रही टीएमसी को अब बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी के करीबी नेता फिरहाद हकीम ने कोलकाता मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो उन्होंने ऐस ममता बनर्जी की अनुमति के बाद किया। पश्चिम बंगाल में यह घटनाक्रम ऐसे वक्त पर सामने आया है जब राज्य में टीएमसी दो फाड़ हो गई है। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 59 विधायकों के साथ खुद के असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा किया है। फिरहाद हकीम ममता बनर्जी के बेहद करीब है। उन्होंने ही भवानीपुर सीट पर चुनाव का प्रबंधन संभाला था।
शुभेंदु अधिकारी की बैठक के बाद इस्तीफा : ममता बनर्जी के करीबी नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम आज मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल हुए थे। प्रशासनिक बैठक में फिरहाद हकीम के जाने से राजनीतिक हलचल मच गई थी। बैठक के बाद उन्होंने कोलकाता मेयर का पद छोड़ दिया। फिरहाद हकीम का परिवार सालों पहले बिहार से कोलकाता गया था। टीएमसी के शासन में फिरहाद हकीम में बड़ी तरक्की की थी। वे ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में शामिल हो गए थे।
बैठक में कौन-कौन हुआ था शामिल : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में टीएमसी विधायक नयना बंद्योपाध्याय, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, अशोक देब और कुणाल घोष शामिल हुए थे। इन सभी नेताओं को बनर्जी का लंबे समय से वफादार माना जाता है। नबन्ना में जहां एक तरफ प्रशासनिक बैठक हुई थी तो वहीं दूसरी तरफ टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 59 विधायकों ने स्पीकर से मिलकर खुद को नेता प्रतिपक्ष बनाने का दावा ठोंक दिया था। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनकी खेमे में अभिषेक बनर्जी के लिए कोई जगह नहीं होगी। ममता बनर्जी चाहें तो वह चीफ एडवाइजर के तौर पर मार्गदर्शन कर सकती हैं। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने उन्हें नेता विपक्ष मान लिया है।
कौन हैं फिरहाद हकीम : 1 जनवरी 1959 को जन्मे फिरहाद हकीम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं। वह पूर्व में पश्चिम बंगाल सरकार में शहरी विकास व नगर पालिका मामलों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं वर्तमान में वह कोलकाता के मेयर (महापौर) थे। वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं। वह पूर्व में कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे हैं। वह साल 2011 में ममता बनर्जी की कैबिनेट में मंत्री बने और 2018 में पहली बार कोलकाता के मेयर चुने गए थे। आजादी के बाद कोलकाता के मेयर बनने वाले वह पहले मुस्लिम नेता हैं।
