नई दिल्ली/इस्लामाबाद : जापान के अधिकारियों ने उस मस्जिद को गिराने का आदेश दिया है, जिसे पाकिस्तानियों ने बिना परमिशन के बनाया है। जापान की इस मस्जिद में जाने वालों में पाकिस्तान के कई सीनियर डिप्लोमेट शामिल थे। मस्जिद के उद्घाटन में पाकिस्तानी राजदूत खुद पहुंचे थे। ऐसे में अब इनके लिए ये घटनाक्रम शर्मिंदगी की वजह बन गया है और वह फंसते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कम से कम विदेशों में पाकिस्तानियों को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।
जाहिद गिशकोरी ने एक्स पर साझा किए अपने एक वीडियो में कहा है कि पाकिस्तानियों ने जापान में कानून का पालन किए बिना मस्जिद बनाकर खड़ी कर दी। मस्जिद तैयार हुई तो वहां जाकर पाकिस्तानी डिप्लोमेट ऐसे फोटो खिंचा रहे थे, जैसे उन्होंने इसमें बहुत मेहनत की है। अब इस मस्जिद को जापानी अथॉरिटी गिराने जा रही है तो सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं।
‘पाकिस्तान की हरकत जापान में’ : जाहिद ने कहा है कि पाकिस्तान में बिना परमिशन और कानून का पालन किए मस्जिद बना देना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान में तो सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का एक तरीका यह रहा है कि उस पर मस्जिद बना दी जाए और उसके परिसर में अपनी व्यापारिक गतिविधि चलाई जाए। ऐसे हजारों मामले अदालतों में चल रहे हैं।
जाहिद ने आगे कहा कि मस्जिद-मदरसा बनाकर जमीन पर कब्जे का तरीका पाकिस्तान में चल सकता है। यहां मजहबी जज्बात बहुत ज्यादा हैं और अगर कोई मस्जिद का विरोध करता है तो उसे मुश्किल होती है। ऐसा जापान में नहीं होगा, वहां गैर-कानूनी जमीन पर बनी मस्जिद में जाकर एक बड़े राजनयिक (राजदूत) मुश्किल में पड़ गए हैं।
क्यों फंसे पाकिस्तानी राजदूत : जापान सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत गैर-कानूनी निर्माण और जोनिंग नियमों के उल्लंघन के कारण मस्जिद को गिराया जाएगा। इसे ‘जामा मस्जिद रमजान’ नाम दिया गया है। यह मस्जिद कावागो शहर के शिमो-अकासाका में है। जापान में पाकिस्तान के राजदूत ने मस्जिद का उद्घाटन किया था।
जापानी अधिकारियों ने कहा है कि इसे बिना जरूरी मंजूरी के बनाया गया। मस्जिद का उद्घाटन साल की शुरुआत में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद ने किया था। जांच में पता चला कि इमारत को सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत जरूरी मंजूरी लिए बिना बना दिया गया।
कावागो शहर के अधिकारियों का कहना है कि यह इमारत एक प्रतिबंधित इलाके में बनाई गई थी। यहां किसी भी निर्माण की मनाही है, जब तक कि इसके लिए खास मंजूरी ना ली जाए। ऐसे में इस मस्जिद को गिराया जा सकता है।
