गुना : खेल के मैदान पर बेटियों को आत्मरक्षा का पाठ पढ़ाने वाले दो कराटे कोच को मध्य प्रदेश में गुना की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक नाबालिग कराटे खिलाड़ी के साथ कई बार गैंगरेप करने के जघन्य मामले में यह ऐतिहासिक फैसला आया है। विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने दोनों आरोपी कराटे कोचों, जगवीर जाटव (40) और सचिन भटनागर (30) को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में तीसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
मुंबई से मलेशिया तक सालों चला खेल : यह पूरा मामला साल 2017 में शुरू हुआ था, जब गुना के पड़ोसी जिले की रहने वाली महज 12 साल की एक मासूम बच्ची ‘गुना एमपी वाडो काई कराटे एसोसिएशन’ में आत्मरक्षा के गुर सीखने आई थी। वहां सिखाने वाले कोच जगवीर और सचिन ने उसकी कम उम्र और नासमझी का फायदा उठाना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने न सिर्फ गुना में बल्कि मुंबई और देश से बाहर मलेशिया ले जाकर भी मासूम के साथ कई बार सामूहिक दुष्कर्म किया। यह खौफनाक सिलसिला 2017 से लेकर 2019 तक लगातार चलता रहा। साल 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से यह सिलसिला थमा, लेकिन 2021 में आरोपियों ने दोबारा पीड़िता से संपर्क करने की कोशिश की, जिसके बाद इस खौफनाक सच का पर्दाफाश हुआ।
आरोपियों ने पीड़िता की नासमझ मानसिक स्थिति का फायदा उठाया। उन्होंने न केवल व्यक्तिगत विश्वास को धोखा दिया, बल्कि गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित करके सामाजिक मूल्यों को तार-तार किया है। इस जघन्य अपराध से पीड़िता को जो मानसिक आघात लगा है, उसका असर उसकी पूरी जिंदगी पर रहेगा। -विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो कोर्ट गुना
कैसे खुला पूरा मामला : साल 2021 में जब आरोपियों ने दोबारा दबाव बनाना शुरू किया, तो सहमी हुई पीड़िता ने अपनी मां को सब कुछ सच-सच बता दिया। बेटी की दर्दनाक दास्तान सुनकर पैरों तले जमीन खिसकने के बाद परिवार ने गुना कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था, जिसके बाद से ही अभियोजन पक्ष लगातार मजबूत पैरवी कर रहा था।
समाज के लिए नजीर बनेगा कोर्ट का कड़ा रुख : इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों और पीड़िता के परिवार की आंखों में न्याय मिलने की संतुष्टि साफ देखी जा सकती थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि ऐसे रक्षकों के कृत्य से समाज में खेल और गुरुओं के प्रति अविश्वास पैदा होता है। कोर्ट ने भी माना कि कम उम्र में हुए इस यौन शोषण ने बच्ची को वह मानसिक ट्रॉमा दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। समाज में खेल की ट्रेनिंग ले रही अन्य बेटियों की सुरक्षा के लिहाज से इस फैसले को बेहद अहम और नजीर पेश करने वाला माना जा रहा है।
संक्षेप में जानिए पूरा मामला : गुना के कराटे ट्रेनिंग सेंटर में 2017 में एक 12 साल की बच्ची सीखने आई थी। वहां के दो कोचों, जगवीर जाटव और सचिन भटनागर ने उसकी मासूमियत का फायदा उठाकर उसके साथ लगातार गैंगरेप किया। वे उसे टूर्नामेंट और ट्रेनिंग के बहाने मुंबई और मलेशिया भी ले गए और वहां भी दरिंदगी की। 2021 में पीड़िता की शिकायत पर गुना कैंट पुलिस ने केस दर्ज किया था, जिसमें अब दोनों को उम्रकैद की सजा मिली है।
