धनबाद : झारखंड में धनबाद सदर अस्पताल के मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) के चिकित्सक एवं सभी कर्मी मेरे लिए भगवान के समान है… उन्होंने इलाज कर मेरे जिगर के टुकड़े को नया जीवन दिया है। यह भावुक भाव देवघर से धनबाद सदर अस्पताल के एमएनसीयू में नवजात बच्चे का इलाज कराने आईं अन्नु कुमारी ने व्यक्त किए।
दरअसल, अन्नु कुमारी और किशोर कुमार साव के नवजात शिशु, सीवियर नियोनेटल सेप्सिस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। परिजनों ने इलाज के लिए 16 जून को जमुई से देवघर जाकर अपने नवजात शिशु को एक अस्पताल में भर्ती कराया था।
22 जून की रात देवघर के अस्पताल के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। उन्होंने बच्चे को किसी बेहतर अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। अन्नु कुमारी ने कहा कि उन्होंने धनबाद के सदर अस्पताल में बेहतरीन इलाज के बारे में बहुत कुछ सुना था। इसलिए बिना कोई देरी किए और समय गंवाए, पूरी आशा और विश्वास के साथ वह अपने बच्चे को लेकर धनबाद सदर अस्पताल के एमएनसीयू पहुंची।
यहां जांचोपरांत बच्चे के रक्त में इंफेक्शन बताया गया। सारी जांच कराने के बाद रिपोर्ट आ गई और डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। उसे विश्वास नहीं था कि उसका नवजात शिशु स्वस्थ हो सकेगा। तीन-चार दिन के इलाज से बच्चे की स्थिति में सुधार होता दिखा। इससे उम्मीद की एक किरण जागी।
अन्नु कुमारी ने बताया कि एक सप्ताह के बाद उसके बच्चे की स्थिति पहले से बहुत बेहतर है। अस्पताल के डॉक्टर और नर्स भगवान के समान है। उन्होंने उसके बच्चे को नया जीवन दिया है।
वहीं एमएनसीयू के प्रभारी डॉ जितेंद्र कुमार ने बताया कि शिशु सीवियर नियोनेटल सेप्सिस से पीड़ित था। यह नवजात शिशुओं में होने वाला एक जानलेवा रक्त संक्रमण है। यह स्थिति 28 दिन या उससे कम उम्र के बच्चों में होती है, जो मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण फैलती है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें तुरंत अस्पताल में भर्ती करके एंटीबायोटिक थेरेपी और गहन चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
बताया कि शिशु जब 22 जून को एमएनसीयू में आया तब उसे तेज बुखार और सांस लेने में दिक्कत थी। उसके हाथ और पैरों में स्किन डिसऑर्डर शुरू हो गया था। यह रक्त कोशिकाओं में खून का थक्का जमने से होता है। इसके कारण शिशु के हाथ-पैर नीले पड़ रहे थे। जांच करने के बाद शिशु की ट्रीटमेंट शुरू की गई। धीरे-धीरे बच्चे में सुधार नजर आने लगा। वर्तमान में उसकी स्थिति पहले से बहुत बेहतर है। शिशु की बीमारी लगभग 90% समाप्त हो चुकी है। बुखार आना भी बंद हो गया है। सांस की दिक्कत भी नहीं है। आगामी तीन-चार दिनों के बाद शिशु को यहां से स्वस्थ करके डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि धनबाद सदर अस्पताल का एमएनसीयू विभाग लगातार अत्यंत गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं के लिए जीवन रक्षक साबित हो रहा है, जो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता को दर्शाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की दृढ़ इच्छाशक्ति के फलस्वरूप विगत एक वर्ष में इस अस्पताल की सूरत और सीरत दोनों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। पिछले एक वर्ष में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रबंधन के कारण न केवल अस्पताल की साख मजबूत हुई है, बल्कि आम जनमानस का भरोसा भी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर तेजी से बढ़ा है। केवल जिले के मरीजों के लिए नहीं बल्कि पड़ोसी जिले और पड़ोसी राज्य के आमजनों की पहली और विश्वसनीय पसंद बनकर उभरा है।
