J&K : अनंतनाग के लाल चौक पर आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर की गोलीबारी, हेड कांस्टेबल शहीद

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नई दिल्ली : 15 महीने की शांति के बाद कश्मीर में शांति बुधवार को भंग हो गई और माहौल गोलियों से गूंज उठा. अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए हमले के बाद से घाटी में कोई बड़ी आतंकी वारदात दर्ज नहीं की गई थी. लेकिन अब, जब अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं और चप्पे-चप्पे पर कड़ा पहरा है, तब आतंकियों ने हमला कर दिया. बुधवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे अनंतनाग के लाल चौक पर आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी कर दी. इस गोलीबारी में जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी शहीद हो गए.

खास बात ये है कि कश्मीर में अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद कोई अटैक नहीं हुआ था. इतने समय बाद अब आतंकी वारदात हुई है और अब United Liberation Council नाम के एक मुखौटा संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

एक से ज्यादा आतंकी रहे हमले में शामिल : इस हमले का अमरनाथ यात्रा से भी कनेक्शन भी है. वैसे तो खराब मौसम की वजह से अमरनाथ यात्रा फिलहाल रोक दी गई है. लेकिन जहां आतंकी हमला हुआ है, वो अमरनाथ यात्रा के रूट में आता है. जम्मू कश्मीर पुलिस के जो जवान शहीद हुए, वो अमरनाथ यात्रा ड्यूटी में ही तैनात थे. बताया जा रहा है कि इस हमले में एक से ज्यादा आतंकवादी शामिल थे. जो हमले के बाद पास के जंगलों में फरार हो गए.

इस हमले के बाद एक नए आतंकवादी संगठन का नाम सामने आया है. ULC- यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल. इसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है. ULC के नाम से एक पोस्ट कर के हमले की जिम्मेदारी ली गई. ये नाम पहली बार सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ULC भी TRF की तरह ही लश्कर ए तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन है.

2000 से ज्यादा OGW यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स हिरासत में : इस आतंकी हमले में आतंकियों को स्थानीय मदद का शक भी जताया जा रहा है. जिस जगह ये हमला हुआ है वो घनी आबादी वाला इलाका है. अमरनाथ यात्रा की वजह से सुरक्षाबलों की भारी तैनाती है.. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आतंकवादी हथियार लेकर यहां तक पहुंचे कैसे. आतंकवादियों के मददगारों पर शिकंजा कसने के लिए पूरे कश्मीर में 2000 से ज्यादा OGW यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स को हिरासत में लिया गया है. ओवर ग्राउंड वर्कर वो लोग होते हैं जो सरहद के इस पार रहकर आतंकवादियों की मदद करते हैं.

पहलगाम हमले के बाद से ही जम्मू कश्मीर में OGW पर सुरक्षाबलों की सख्ती काफी ज्यादा बढ़ गई है. पहलगाम हमले से लेकर अब तक 2,800 से ज्यादा OGW सुरक्षाबलों के रडार पर हैं. 150 से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया है. जितना जरूरी एक एक आतंकवादी को खत्म करना है. उतना ही जरूरी है उनके मददगारों के नेटवर्क को खत्म करना क्योंकि आम लोगों के बीच छिपे मददगारों की वजह से ही आतंकवादियों को शह मिलती है.

अमरनाथ यात्रा की सख्त सुरक्षा के बावजूद चूक कहां हुई? : खास बात ये है कि अमरनाथ यात्रा के दौरान पूरे जम्मू-कश्मीर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया जाता है. इसके बावजूद आतंकियों ने वहां पर हमला कर दिया तो इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं. साथ ही आतंकियों की बदलती रणनीति का भी पता चलता है. डिफेंस एक्सपर्टों के मुताबिक, आतंकी अब अपने हमलों में ‘सॉफ्ट टारगेट’ और सरप्राइज एलीमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

चूंकि सुरक्षा बलों का मुख्य ध्यान पारंपरिक यात्रा मार्गों, संवेदनशील हाईवे और संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर केंद्रित रहता है. लिहाजा,अब आतंकी ऐसे इलाकों को चुन रहे हैं, जहां पर सुरक्षा बलों की उपस्थिति थोड़ी कम हो और वे हमले करके आसानी से फरार हो जाएं.

नई रणनीति से हमलों को अंजाम दे रहे आतंकी : इसके साथ ही आतंकी अब ‘हाई-वैल्यू’ मैसेजिंग की रणनीति पर काम करते नजर आ रहे हैं. सब जानते हैं कि अमरनाथ यात्रा के समय सुरक्षा व्यवस्था अपने चरम पर होती है. ऐसे में इस यात्रा के दौरान हमला करके आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच सकते हैं. वे यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि घाटी में स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है.

इस हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में हाइब्रिड स्लीपर सेल्स का छिपा खतरा फिर सामने आ गया है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बड़े आतंकी नेटवर्क के ध्वस्त होने के बाद अब स्थानीय ‘हाइब्रिड आतंकवादियों’ (वे लोग जो आम नागरिकों की तरह रहते हैं और अचानक हमला करते हैं) का इस्तेमाल किया जा रहा है. चूंकि, इनका कोई पूर्व रिकॉर्ड नहीं होता है. इसलिए उन्हें पकड़ना खुफिया एजेंसियों के लिए कठिन चुनौती साबित हो रहा है.