नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन देश की नेविगेशन प्रणाली को और भी अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसरो ने घोषणा की है कि वह आगामी 30 अक्टूबर 2026 को रात 11:51 बजे जीएसएलवी-एफ18 (GSLV-F18) रॉकेट के माध्यम से बहुप्रतीक्षित नौवहन उपग्रह ‘एनवीएस-03’ (NVS-03) को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करेगा।
इसरो ने एक्स पर दी जानकारी : इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि GSLV-F18, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 20वीं उड़ान है। GSLV-F18 रॉकेट, NVS-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड (SLP) से लॉन्च करने की योजना है।
नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट : ISRO ने पोस्ट में आगे लिखा कि NVS-03, अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है। इसे IRNSS सीरीज के लिए नेविगेशन सेवाओं को लगातार जारी रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस सैटेलाइट में बाहर से खरीदी गई एटॉमिक घड़ियों के साथ-साथ स्वदेशी एटॉमिक घड़ी भी लगी है। इसमें मौजूदा L5/S सिग्नलों के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल हैं, जो भारत की मुख्य भूमि और भारतीय भू-राजनीतिक सीमा के चारों ओर 1500 km के दायरे तक कवरेज प्रदान करते हैं।
जीपीएस पर निर्भरता होगा कम : इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में सक्रिय होने से देश में जीपीएस (GPS) पर निर्भरता कम होगी। नाविक प्रणाली का उपयोग सामान्य नागरिकों के लिए मोबाइल नेविगेशन, नागरिक उड्डयन और समुद्री जहाजों के आवागमन में तो होगा ही, साथ ही यह थल और वायु सेना के सामरिक ऑपरेशन्स के लिए भी सटीक और सुरक्षित डेटा मुहैया कराएगा।
