बंगाल : TMC- कांग्रेस के विलय की अटकलें तेज… ममता अकेले लौटीं कोलकाता, दिल्ली में ही डटे हैं अभिषेक

TMC-Cong-Delhi-to-Kolkata

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी टीएमसी का कांग्रेस में विलय करने जा रहे हैं। इन संभावनाओं पर विचार किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। दो दिन नई दिल्ली में बिताने के बाद ममता बनर्जी बुधवार को कोलकाता लौट आईं। हालांकि अभिषेक बनर्जी अभी भी दिल्ली में ही हैं। मंगलवार को ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हुई बैठक और बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अभिषेक बनर्जी की अलग से हुई बैठक के बाद टीएमसी के कांग्रेस में पुनर्विलय की अटकलों को बल मिला।

ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गईं।

कांग्रेस से ही निकलकर ममता बनर्जी ने बनाई थी टीएमसी : ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था।

हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के नवगठित लेकिन बहुमत वाले गुट के नेता और सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्मिलन की किसी भी संभावना से स्पष्ट रूप से इनकार किया।

ऋतब्रत बनर्जी ने कसा तंज : ज्यादातर विधायक कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। ज्यादातर सांसद भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। कई जिला नेता और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। तो फिर विलय का सवाल ही कहां उठता है? ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि हमारा गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य तृणमूल कांग्रेस है। हमने 58 विधायकों के साथ शुरुआत की थी, और आज यह संख्या 64 है। मैंने सुना है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सदस्यों में से अधिकांश अब बागी गुट में हैं। हम मुख्य तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए हमारी पार्टी के कांग्रेस में विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता।

हमारे साथ विधायकों की संख्या पहले ही 64 के पार हो चुकी है। कल एक और विधायक के हमारे साथ जुड़ने पर यह संख्या 65 हो सकती है। जाहिर है, असली तृणमूल कांग्रेस हम ही हैं। दिल्ली में कौन किससे मिलता है, यह उनका मामला है और हमारे लिए इसका कोई महत्व नहीं है।

कांग्रेस में आने की दो शर्तें : पश्चिम बंगाल में भी राज्य कांग्रेस नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्विलय की संभावना पर संशय जताया। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार ऐसी संभावना में दो प्रमुख कारक शामिल हैं। सरकार ने कहा कि पहला, जो भी कांग्रेस में वापस आना चाहेगा, उसे राहुल गांधी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार करना होगा। दूसरा, यदि कोई यह सोचता है कि वह अपने भ्रष्टाचार के पुराने कृत्यों के कारण कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए कांग्रेस का इस्तेमाल ढाल के रूप में करेगा, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।

दिल्ली में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसी अटकलें भी तेज हैं कि ममता बनर्जी नीत तृणमूल का धड़ा कांग्रेस के साथ नज़दीकी रिश्ते बनाने या पार्टी के विलय पर विचार कर सकता है।