नई दिल्ली : भारत ने कहा है कि देश में रह रहे सभी अवैध नागरिकों के मामलों से कानून के अनुसार निपटा जाएगा। 2,680 मामले बांग्लादेशी पक्ष को भेजे हैं, ताकि वे उन लोगों की नागरिकता की पुष्टि कर सकें जिनके नाम हमने उन्हें सौंपे हैं। एक बार नागरिकता की पुष्टि हो जाने के बाद, बांग्लादेश को इन नागरिकों को सौंप दिया जाएगा।
अवैध नागरिकों पर कानून के मुताबिक होगी कार्रवाई : विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक ब्रिफिंग में कहा, ‘भारत में रह रहे सभी अवैध नागरिकों से कानून के अनुसार निपटा जाएगा। बांग्लादेश के मामले में, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, हमने 2,680 या उससे ज्यादा मामले बांग्लादेशी पक्ष को भेजे हैं, ताकि वे उन लोगों की नागरिकता की पुष्टि कर सकें जिनके नाम हमने उन्हें सौंपे हैं। एक बार नागरिकता की पुष्टि हो जाने के बाद, हम बांग्लादेश के इन नागरिकों को वापस भेजने की स्थिति में होंगे।’
वेरिफिकेशन के बाद बांग्लादेश को सौंप दिया जाएगा-जायसवाल : जायसवाल ने कहा, ‘कई मामलों में, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, ये सत्यापन 5 साल या उससे ज़्यादा समय से लंबित हैं। हमें उम्मीद है कि इस खास मुद्दे पर हमें बांग्लादेश से जल्द ही जवाब मिलेगा, ताकि दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय व्यवस्था के आधार पर, यहां रह रहे इन लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा या निर्वासित किया जा सके।’
बंगाल सरकार ने 11 डिटेंशन सेंटर बनाए : बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ नीति के तहत अब तक 11 निरुद्ध केंद्र तैयार किए हैं जिनमें 335 अवैध प्रवासियों को रखा गया है। बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट में सबसे ज्यादा अवैध प्रवासी हैं, जिनके बांग्लादेशी या रोहिंग्या होने का संदेह है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अब तक 11 निरुद्ध केंद्र तैयार किए गए हैं। इनमें से कुछ पुलिस जिलों के तहत संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ जिला स्तर पर संचालित हो रहे हैं।’ इनमें से आठ केंद्र बारुईपुर, सुंदरबन, बशीरहाट, बनगांव, बारासात, मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और कृष्णा नगर पुलिस जिलों में हैं, जबकि तीन केंद्र मालदा, कूचबिहार और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में हैं।
