चतरा : झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले 45 वर्षीय रमेश गंझू एक पारिवारिक अनबन के बाद करीब 16 साल पहले घर छोड़कर चला गया था। उनकी पत्नी मुन्ना देवी और दोनों बेटों ने सालों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर वो थक-हारकर बैठ गए थे। लेकिन फिर, 18 जून को सोशल मीडिया और तकनीक के मेल ने वह कर दिखाया, जो 16 साल की कानूनी ओर व्यक्तिगत खोजबीन नहीं कर सकी थी।
16 वर्षों तक अलग-अलग शहरों में भटकता रहा : मानसिक अस्वस्थता और नशे की लत के चलते रमेश सालों तक देश के अलग-अलग शहरों में भटकता रहा। आखिरकार वो चेन्नई की समाजसेवी संस्था उदवुम करंगल के वॉलंटियर्स की नजर उस पर पड़ी। वो उन्हें तुरंत अपने रिहैबिलिटेशन सेंटर ले आए, जहां उन्हें जरूरी मेडिकल और मानसिक इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इलाज के बात अतीत की धुंधली यादें आने लगी : जैसे-जैसे इलाज से रमेश का मानसिक स्थिति सुधरी, उन्हें अपने अतीत की धुंधली यादें आने लगीं। उन्होंने बताया कि वो झारखंड के रहने वाले है। जिसके बाद संस्था के सोशल वर्कर श्रीनिवास राव और अन्य वालंटियर्स ने तुरंत उनकी तस्वीर और जानकारी सोशल मीडिया- व्हाट्सएप के कई ग्रुप में फैला दी।
किराना दुकान के मालिक ने पहचान कर परिजनों को दी सूचना : यह मैसेज घूमते-घूमते झारखंड के कल्याणपुर गांव की एक किराना दुकान के मालिक तक पहुंचा, जिसने रमेश को पहचान लिया और तुरंत उनके परिवार को इसकी सूचना दी।
बेटा और पिता एक ही शहर में अनजान : कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पता चला कि रमेश का बड़ा बेटा नागेश्वर भी रोजगार के सिलसिले में चेन्नई के बाहरी इलाके में ही रह रहा था। उसी रिहैब सेंटर के महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर पिता और बेटे एक ही शहर में अनजान बनकर रह रहे थे। लेकिन इस एक मैसेज ने कुछ ही घंटों में दोनों को आमने-सामने ला खड़ा किया।
पत्नी के आंखों में आंसू छलके : 21 जून को रमेश आखिरकार अपने घर लौट आए। जब वो लापता हुए थे, तब नागेश्वर की उम्र सिर्फ 5 साल थी। आज अपने पिता को वापस पाकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। वहीं रमेश की पत्नी मुन्ना देली ने भावुक होकर कहा कि भगवान ने उनकी बरसों पुरानी दुआएं सुन ली है।
