नई दिल्ली/वाशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना होंगे। वह कजाखस्तान के बैकोनूर अंतरिक्ष केंद्र से दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ आठ महीने के मिशन पर जाएंगे।
रूस का रोस्कोस्मोस सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान मंगलवार रात 8 बजकर 17 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर बैकोनूर अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरेगा। उड़ान भरने के करीब तीन घंटे बाद यान अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचकर उनसे जुड़ने की उम्मीद है। अनिल मेनन के साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना भी आईएसएस के 75वें अभियान का हिस्सा होंगे।
सोयूज यान मंगलवार रात 11 बजकर 56 मिनट पर अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ जाएगा। इसके बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री बुधवार तड़के करीब 1 बजकर 25 मिनट पर आईएसएस में प्रवेश करेंगे।
आईएसएस पर किन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ रहेंगे मेनन? : अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने के बाद मेनन और उनके साथी नासा के अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री सर्गेई कुद-स्वेर्चकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रे फेद्याएव के साथ जुड़ जाएंगे।
कौन हैं अनिल मेनन? :
- अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। उनके माता-पिता यूक्रेन और भारत से जाकर अमेरिका में बसे थे।
- मेनन आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ हैं और अमेरिकी अंतरिक्ष बल में कर्नल के पद पर हैं।
- अमेरिकी वायुसेना में काम करने के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान में ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के दौरान अग्रिम मोर्चे पर सेवा दी थी।
- उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों का इलाज किया।
- 49 वर्षीय मेनन ने भारत में भी एक साल बिताया है। वह रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर के रूप में भारत आए थे, जहां उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान का अध्ययन और समर्थन किया।
नासा और स्पेसएक्स में कब शुरू हुआ करियर? : मेनन ने 2014 में नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में अपना करियर शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया। 2018 में वह स्पेसएक्स से जुड़े। वहां उन्होंने कंपनी का चिकित्सा कार्यक्रम शुरू किया, पहली मानव अंतरिक्ष उड़ानों की तैयारी में मदद की और चांद, मंगल और उससे आगे के अभियानों के लिए बनाए जा रहे स्टारशिप रॉकेट और अंतरिक्ष यान के विकास में योगदान दिया। दिसंबर 2021 में उनका चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ। इसके बाद उन्होंने दो साल के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
