धनबाद : झारखंड के धनबाद में उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में बुधवार को जिले के सभी निजी विद्यालयों के साथ बैठक आयोजित की गई। जिसमे वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट फीस, री-एडमिशन फीस, स्कूल में या निर्धारित दुकान से ही किताब, ड्रेस इत्यादि खरीदने सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें उनको झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधित) अधिनियम, 2017 के नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में वार्षिक शुल्क को लेकर उपायुक्त ने कहा कि सभी विद्यालय इसका विस्तृत विवरण प्रशासन को उपलब्ध कराएंगे तथा स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड कर, स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाएंगे। अभिभावकों को डेवलपमेंट फीस लेने का उद्देश्य बताएंगे। कोई भी निजी विद्यालय री-एडमिशन के नाम पर छात्रों से फीस नहीं ले सकेंगे। वहीं यदि वार्षिक शुल्क लेते हैं तो विद्यालय में गठित शुल्क समिति से विचार कर उसका दर निर्धारण करेंगे। निजी विद्यालय अभिभावक को एक बार में वार्षिक शुल्क जमा करने का दबाव नहीं बनाएंगे। अभिभावक क्वार्टरली वार्षिक फीस जमा कर सकेंगे।
उपायुक्त ने सभी निजी विद्यालयों को अगले सत्र से लिए नवंबर तक किताबों (मुद्रक व किताब का नाम सहित) एवं स्कूल ड्रेस तथा जनवरी में डेवलपमेंट फीस का विस्तृत विवरण स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करने एवं स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाने का निर्देश दिया। साथ में 5 साल से पहले स्कूल ड्रेस नहीं बदलने तथा वेबसाइट पर पब्लिश किताब का नाम नहीं बदलने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्कूल के प्रांगण में स्कूल ड्रेस एवं किताबें नहीं बेचने की सख्त हिदायत दी। उपायुक्त ने कहा कि अगले सत्र का बुक लिस्ट और स्कूल ड्रेस का विवरण वेबसाइट में होगा तो अन्य दुकानदार भी संबंधित किताबें और स्कूल ड्रेस अपनी दुकान में रख सकेंगे। इससे अभिभावकों के पास कम दर पर किताबें व स्कूल ड्रेस खरीदने का विकल्प रहेगा।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने निजी विद्यालयों को इस बैठक से पहले आयोजित जिला स्तरीय शुल्क समिति की बैठक में लिए गए निर्णय से अवगत कराया।
जिसमें शुल्क का निर्धारण दिए गए प्रावधान के अनुसार करने, विद्यालय में शुल्क समिति का गठन कर विद्यालय के वेबसाइट पर अपलोड करने, विगत एक वर्ष का ऑडिट रिपोर्ट, विद्यालय का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट जमा करने, विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन करने, स्कूल के सभी शिक्षक, शिक्षिकाओं का नाम, पे-स्केल सहित डाटा विद्यालय के वेबसाइट पर पब्लिश करने सहित अन्य निर्णय से अवगत कराया।
उपायुक्त ने कहा कि निजी विद्यालयों को “नोट फॉर प्रॉफिट” (लाभ-रहित) के सिद्धांतों पर चलना चाहिए। इसलिए सभी निजी विद्यालय एक सप्ताह के अंदर उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कर लें। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित पांच सदस्य टीम स्कूलों की औचक जांच करेगी। अनियमितता या निर्देश का उल्लंघन होने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
बैठक में बीपीएल कोटा में कम नामांकन पर उपायुक्त ने चिंता प्रकट करते हुए बीपीएल कोटा में 25% सीट रिजर्व रखने का निर्देश दिया। साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूल बस, स्कूल वैन के चालक का नाम, मोबाइल नंबर तथा उसका पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराने, जो बच्चे निजी वाहन से स्कूल आते हैं उसके चालक का भी पूरा विवरण एवं पुलिस वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सभी स्कूल बस एवं स्कूल वैन में सीसीटीवी कैमरे एवं जीपीएस लगाने, स्कूल शुरू होने और स्कूल में छुट्टी होने के समय स्कूल के पास चार अतिरिक्त कर्मियों को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए प्रतिनियुक्त करने का भी निर्देश दिया।
इसके अलावा बच्चों की मानसिक स्थिति पर निगरानी रखने, आवश्यकता पड़ने पर उनकी काउंसलिंग कराने, यदि बच्चे कोचिंग संस्थान में जाते हैं तो उनसे फीडबैक लेने, छात्राओं के लिए विशेष व्यवस्था रखने, इको क्लब का गठन करने सहित अन्य बिंदुओं पर विस्तृत दिशा निर्देश दिए।
इससे पूर्व आयोजित जिला स्तरीय शुल्क समिति की बैठक में विधायक धनबाद राज सिन्हा ने वार्षिक शुल्क को क्वार्टरली करने का अनुरोध किया। जबकि विधायक निरसा अरूप चटर्जी ने सभी जनप्रतिनिधियों को बीपीएल कोटा में हुए नामांकन की जानकारी उपलब्ध कराने तथा विधायक सिंदरी चंद्रदेव महतो ने वार्षिक शुल्क का विस्तृत विवरण देने का अनुरोध किया।
बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, उप विकास आयुक्त सन्नी राज, डीएफओ विकास पालीवाल, डीटीओ दिवाकर सी द्विवेदी, डीईओ अभिषेक झा, डीएसई आयुष कुमार, अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी कुमारी स्वाती, सांसद, गिरिडीह के प्रतिनिधि सुभाष रवानी, विधायक टुंडी के प्रतिनिधि जगदीश कुमार चौधरी, विधायक झरिया के प्रतिनिधि अखिलेश सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट अजय कुमार सिंह, प्राचार्या डॉ सरिता सिन्हा, प्राचार्य सुमंत कुमार मिश्र, संतोष कुमार सिंह, मनोज कुमार शर्मा के अलावा जिले के कई निजी विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
