झारखंड : गुमला में आंचल फैलाकर पति के इलाज के लिए मांगी मदद, CM हेमंत ने उपायुक्त को दिए मदद के निर्देश

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गुमला : झारखंड के गुमला जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है। गुमला के सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक गरीब मरीज के उपचार के लिए उसकी पत्नी को शहर की व्यस्त सड़कों पर राहगीरों के सामने आंचल फैलाकर आर्थिक सहायता मांगने को मजबूर हैं।

सीएम हेमंत सोरेन ने सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया : महिला की इस विवशता की खबर मीडिया से मिलने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुमला के उपायुक्त को इलाज के लिए हर संभव मदद करने का निर्देश दिया। जिसके बाद जिला प्रशासन की ओर से तत्काल पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सदर अस्पताल ने इलाज में असमर्थता जताई : दरअसल, गुमला सदर प्रखंड के काटासारू गांव के रहने वाले जगन्नाथ तिर्की कई दिनों से गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने शुरुआती चिकित्सा प्रक्रिया पूरी करने के बाद संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए आगे इलाज कराने में असमर्थता जताई। इसके बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया। घर की माली हालत पहले से ही खराब होने के कारण मरीज की पत्नी ने पति की जान बचाने के लिए लोगों से मदद मांग रही हैं। इस घटना ने राज्य की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं और जन कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

कमाऊ सदस्य अस्पताल के बेड पर, घर में छाई आर्थिक तंगी : मरीज जगन्नाथ की पत्नी रोहिणी कुजूर ने का कहना है आर्थिक तंगी के कारण वो अपने पति का सही तरीके से इलाज नहीं करा पा रही हैं। गंभीर बात यह है कि इस परिवार का आज तक न तो कोई राशन कार्ड बना है और न ही आयुष्मान कार्ड जैसी किसी योजना का लाभ उन्हें मिल रहा है। पूरे परिवार में जगन्नाथ ही एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति थे, लेकिन उनके बीमार हो जाने के कारण अब घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है।

जशपुर रोड पर आंचल फैलाकर मांगी मदद : जब अस्पताल से कोई विशेष राहत नहीं मिली और दवाइयां बाहर से खरीदने की नौबत आ गई, तो पति की जान बचाने की आस में रोहिणी कुजूर स्थानीय जशपुर रोड स्थित टंगरा मार्केट के समीप सड़क किनारे बैठ गई वह वहां से गुजरने वाले हर राहगीर के सामने अपना आंचल फैलाकर रो-रोकर इलाज के लिए चंद रुपयों की भीख मांगती नजर आई। इस भावुक दृश्य को देखकर सड़क से गुजरने वाले राहगीरों का दिल पसीज गया और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार 10, 20, 50, 100 और 200 रुपये तक की आर्थिक सहायता रोहिणी के आंचल में डाली। हालांकि, परिजनों का कहना है कि गंभीर बीमारी के महंगे इलाज और महंगी बाहरी दवाइयों के आगे ये सहायता काफी कम है।