इंदौर : कहते हैं एक मां के लिए उसके बच्चे की मौत से बड़ा कोई दुख नहीं होता। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां बेटे के निधन के सदमे में मां के प्राण भी पखेरू हो गए। रविवार को जब घर से बेटे की अंतिम यात्रा निकलने वाली थी, तभी शव के पास बैठी मां ने बेटे के सिर पर हाथ फेरा, बेसुध हुईं और हमेशा के लिए आंखें बंद कर लीं।
सोमवार सुबह जब एक ही घर से मां और बेटे की अर्थी एक साथ उठी, तो पूरे इलाके की आंखें नम हो गईं। लेकिन इस वज्रपात के बीच भी इस टूटे हुए परिवार ने जो फैसला लिया, वह मिसाल बन गया है। उन्होंने मां-बेटे के नेत्रदान कर चार लोगों की जिंदगी रौशन कर दी।
बेटे की विदाई के वक्त अचानक गिरीं मां : मिली जानकारी के अनुसार, इंदौर के रहने वाले 55 वर्षीय राजुल शर्मा का रविवार को निधन हो गया था। रविवार शाम करीब 5 बजे घर में मातम पसरा हुआ था और राजुल की अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान उनकी 75 वर्षीय मां किरण शर्मा अपने लाडले के शव के पास बैठी बिलख रही थीं। रोते-रोते उन्होंने जैसे ही आखिरी बार अपने बेटे के सिर पर हाथ फेरा, सदमे के कारण वह अचानक बेसुध होकर नीचे गिर पड़ीं।
अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया मृत, टालनी पड़ी शवयात्रा : परिजन आनन-फानन में वृद्ध मां किरण शर्मा को लेकर अस्पताल भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दोहरे हादसे के बाद रविवार शाम को होने वाली अंतिम विदाई को टालना पड़ा। सोमवार को मां और बेटे की शवयात्रा एक साथ निकाली गई, जिसे देख हर राहगीर की रुलाई फूट पड़ी।
दुख की घड़ी में लिया अंगदान का ऐतिहासिक फैसला, 4 को मिली नई जिंदगी : दुख और आंसुओं के बीच शर्मा परिवार ने एक ऐसा साहसिक और मानवीय फैसला लिया, जिसकी अब हर तरफ तारीफ हो रही है। परिवार ने दुख की इस घड़ी में भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा और मां किरण शर्मा व बेटे राजुल शर्मा, दोनों का नेत्रदान करा दिया। इस फैसले की बदौलत अब चार दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी का अंधेरा दूर होगा और उन्हें नई रोशनी मिल सकेगी। जाते-जाते भी यह मां-बेटा दुनिया को एक बड़ा संदेश दे गए।
