झारखंड : धनबाद में 782 दागी अपराधियों की पुलिस लाइन में परेड, मिली चेतावनी- अपराध छोड़ो या जेल जाओ

Dhanbad-Police-Line-Parade

धनबाद : झारखंड के धनबाद जिले में पैर पसारते अपराध पर लगाम लगाने और अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने के लिए धनबाद पुलिस ने गुरुवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाया। झारखंड के इतिहास में पहली बार किसी जिले में चिह्नित 782 दागी अपराधियों को पुलिस लाइन बुलाकर उनकी सामूहिक परेड कराई गई। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपराधियों की आंखों में आंखें डालकर साफ शब्दों में चेतावनी दी कहा अपराध छोड़ो, नहीं तो जेल ही अगला ठिकाना होगा।

सुबह से जुटने लगे अपराधी, गतिविधियों की हुई बारीकी से जांच : गुरुवार सुबह से ही जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से चिह्नित अपराधियों को पुलिस लाइन लाया गया। यहाँ न सिर्फ उनकी उपस्थिति दर्ज की गई, बल्कि उनके वर्तमान रहन-सहन, रोजगार, आवागमन और हालिया गतिविधियों का बारीकी से भौतिक सत्यापन हुआ। गंभीर आपराधिक इतिहास वाले तत्वों को विशेष निगरानी सूची में डालते हुए संबंधित थाना प्रभारियों को उनकी चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग करने के सख्त निर्देश दिए गए।

पुलिस की दो टूक चेतावनी : रंगदारी, हत्या, लूट, अवैध वसूली, भूमि कब्जा और हथियारों का प्रदर्शन करने वालों के लिए धनबाद में अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है। समाज की मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है, अन्यथा कानून तोड़ने की कीमत बहुत भारी पड़ेगी।

अपराध नियंत्रण की नई रणनीति : पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अपराध रोकने के लिए केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि अपराधियों के मन में कानून का स्थायी भय पैदा करना भी जरूरी है। इस अभियान का उद्देश्य संभावित अपराधों को घटित होने से पहले ही रोकना और आम जनता में सुरक्षा का भाव जगाना है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सुधरने का यह पहला और आखिरी मौका है; इसके बाद बिना किसी नरमी के सीधे त्वरित गिरफ्तारी और कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। यह अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा।

कोयला चोरों पर मेहरबानी क्यों? : एक तरफ जहां पुलिस लाइन में अपराधियों की परेड कराकर धनबाद पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ धनबाद की पहचान बन चुके अवैध कोयला खनन और संगठित कोयला चोरी पर पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। आखिर धनबाद पुलिस का इन कोयला चोरों के प्रति इतना ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ है? क्या कानून का यह खौफ सिर्फ चुनिंदा अपराधियों के लिए है, या कोयला माफियाओं को इस ‘सख्त संदेश’ से अलग रखा गया है?