पटना : बिहार के बाढ़ में छापा मारने गई पटना पुलिस को खुद ही तलाशी देनी पड़ी, वो भी लाइन में लगकर। नाबालिग जैसे दिखने वाले एक लड़के ने एक-एक पुलिसवालों की गेट पर तलाशी ली। वर्दी पर दो-दो तीन-तीन स्टार सजाए नौजवान पुलिस वाले अपनी-अपनी कमर की तलाशी देते रहे और कंधे पर एके-47 जैसी दिखने वाली राइफलें टंगी रही। दो-दो थानों की टीम एक गैंगस्टर के घर उसे खोजबीन करने पहुंची थी। इसमें महिला पुलिसवालों को भी ले जाया गया था।
एक-एक पुलिस वाले की तलाशी के बाद गंजी और हाफ पैंट पहने नाबालिग जैसे दिखने वाले एक लड़के ने इन्हें दरवाजे के भीतर ले गया। इसी में एक आदमी कह रहा था कि जिसकी चेकिंग नहीं हुई है, वो घर के भीतर नहीं जाएगा। करीब दो दर्जन पुलिसवाले सहमे-सहमे दिख रहे थे। गेट पर इनका वीडियो भी बनाया जा रहा था। ये सबकुछ मात्र पटना से 70-75 किलोमीटर दूर हुआ। इसका (बाढ़) जिला भी पटना है और बिहार की सम्राट सरकार भी पटना से ही चलती है। अपराधियों पर माला चढ़ाने के बयान भी पटना से ही दिए जाते हैं। बिहार के सीएम, डीजीपी, एसएसपी और एसपी भी पटना में ही बसते हैं।
पुलिस की तलाशी वाला पूरा मामला क्या है? : बाढ़ अनुमंडल (पटना जिला) के पंचमहला थाना क्षेत्र स्थित नौरंगा जलालपुर गांव में एक अपराधी के घर रेड करने गई पुलिस टीम का रवैया खाकी की गरिमा को तार-तार कर दिया। एक वीडियो में पुलिसकर्मी अपराधियों के परिजनों के सामने कतार में खड़े होकर अपनी तलाशी देते नजर आए। इस मामले को ‘गंभीरता’ से लेते हुए पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा ने पंचमहला और हाथीदह के थाना अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 23 मई 2026 की शाम करीब 6 बजे हुई, जब एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू हो गई। इस हिंसक वारदात के बाद पंचमहला थाने में कांड संख्या-46/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसी मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई थी।
गोलीबारी के आरोपियों की धरपकड़ और अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार के नेतृत्व में संयुक्त छापेमारी की गई। पुलिस जब कुख्यात अपराधी सोनू और मोनू के घर पहुंची, तो दोनों मुख्य आरोपी फरार मिले। इस दौरान घर पर मौजूद महिलाओं और परिजनों ने पुलिस वालों की चेकिंग की और इसका वीडियो भी बनाया।
जब कतार में खड़ा कर थानेदार की ली गई तलाशी : वीडियो में पुलिस की कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। हाथ को ऊपर उठाकर थानेदार लाइन में लगकर तलाशी दिए। महिला ने सोनू के भाई और कुख्यात अपराधी मोनू से पंचमहला थानाध्यक्ष की फोन पर बात कराई।कार्रवाई करने गई पुलिस टीम ने वहां मौजूद परिजनों के सामने कतार में खड़ी होकर चेकिंग कराई। दबिश देने पहुंचे कानून के रखवाले अपराधियों के डर या दबाव में खुद की तलाशी देते नजर आए। पूरे वाकये से अपराधियों में कानून का डर खत्म होने और पुलिस की छवि खराब होने की बात सामने आई।
पटना SSP ने दोनों थानेदारों को सस्पेंड किया : मामला संज्ञान में आते ही पटना एसएसपी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी वांछित अपराधी के घर पर पुलिसकर्मियों द्वारा खुद की तलाशी देना और अपराधी से फोन पर बात करना घोर अनुशासनहीनता है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) बाढ़-1 की जांच रिपोर्ट के आधार पर पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार को सस्पेंड कर दिया गया। दोनों से पूरे मामले पर जवाब मांगा गया है।
वीडियो में दिख रहे दोनों थाना इंचार्ज काफी नौजवान हैं। इनकी पुलिस ट्रेनिंग में अपनी रक्षा की बात बताई गई होगी लेकिन आरोपी के दरवाजे पर लाइन में लगकर तलाशी के बात को कम से कम नहीं ही सिखाई गई होगी। अगर इतना ही डर था तो अपने सीनियर अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। पूरे देश में पुलिस चाहे जितनी बदनाम हो, मगर कई लोग इस वर्दी को उम्मीद भरी नजरों से जरूर देखते हैं। इन दो थानेदारों के फैसले से बिहार ही नहीं देश के करोड़ों वर्दी वालों का मनोबल कितना टूटा होगा, मापने वाला स्टैंडर्ड यूनिट भी फेल हो जाएगा।
