हरियाणा : रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, IDFC फर्स्ट बैंक के खाते से डकारे 169 करोड़

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चंडीगढ़ : सीबीआई ने चंडीगढ़ बैंक घोटाले में कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने मंगलवार देर शाम हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया। प्रदीप कुमार पिछले कई दिनों से फरार थे और मंगलवार को ही वह अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त हुए हैं। हरियाणा में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां कोई आईएएस अधिकारी सेवानिवृत्ति वाले दिन गिरफ्तार हुआ है। सीबीआई प्रवक्ता ने देरशाम जारी जानकारी में बताया कि प्रदीप कुमार जब हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव थे, उस समय यह घोटाला हुआ है। इस मामले में अब तक 3 आईएएस गिरफ्तार हो चुके हैं।

आईएएस प्रदीप कुमार को आईडीएफसी बैंक सेक्टर 32 चंडीगढ़ शाखा में सरकारी फंड की हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच से पता चला है कि मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर प्रदीप कुमार के कामों का इस फ्रॉड से सीधा कनेक्शन था। उन्होंने अपने स्तर पर इन्वेस्टमेंट से जुड़ा पूरा काम खुद ही संभाला था।ॉ

प्रदीप कुमार ने ऐसे किया फ्रॉड : फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए फंड आईडीएफसी फस्र्ट बैंक को तय लिमिट से कहीं ज़्यादा भेजे गए थे। फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के लिए एचएसपीसीबी के फंड को पहले आईडीएफसी फस्र्ट बैंक, सेक्टर-32 ब्रांच, चंडीगढ़ में खोले गए अकाउंट में ट्रांसफर किया गया। हैरानी की बात है कि इस अकाउंट को खोलने के बारे में डिपार्टमेंट कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा सका।

सीबीआई के अनुसार साजिश इतनी गहरी थी कि बिना किसी मंजूरी के अकाउंट खोल दिया गया और फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए गए। अब तक की जांच से पता चला है कि इस बैंक में कोई फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं बनाया गया था। इसके बजाय, इस अकाउंट से धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए, जिससे सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ और हरियाणा सरकार को लगभग 169 करोड़ का नेट लॉस हुआ।

हरियाणा में सबसे बड़ी राजकीय आर्थिक हानि : सीबीआई के अनुसार बैंक घोटाले में यह हरियाणा के किसी भी प्रभावित सरकारी विभाग को हुआ सबसे बड़ा फाइनेंशियल लॉस है। प्रदीप कुमार कुछ समय से जांच से बच रहे थे और बार-बार कोशिश करने के बाद भी जांच में शामिल नहीं हो रहे थे। सीबीआई द्वारा उनके ठिकाने का पता लगाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई ने राज्य सरकार के कहने पर स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो, हरियाणा से जांच अपने हाथ में ले ली थी।

हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से जुड़ा फ्रॉड, चंडीगढ़ में आईडीएफसी फस्र्ट बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच में हुए एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ डिपार्टमेंट के लगभग 504 करोड़ के सरकारी फंड को कथित तौर पर जाली/अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और फ्रॉड डेबिट ट्रांजैक्शन के ज़रिए निकाला गया।

हरियाणा के इस घोटाले में अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट : अब तक, CBI ने 17 आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की है, जिनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी, दो कंपनिया और छह प्राइवेट व्यक्ति शामिल हैं। CBI चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और CREST से जुड़े चंडीगढ़ के दो मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें पहले ही चार्जशीट दायर की जा चुकी है। एजेंसी ने कहा कि गलत तरीके से ट्रांसफर किए गए सरकारी फंड का पूरा पता लगाने और इसमें शामिल सभी लोगों को सज़ा दिलाने की कोशिशें जारी हैं।