पंजाब : सीएम का कराया जाए डोप टेस्ट, बीजेपी बोली-विधानसभा में शराब पीकर पहुंचे भगवंत मान

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नई दिल्ली : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने बड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके उन पर नशे में विधानसभा में आने का आरोप लगाया गया है। साथ ही सीएम का डोप टेस्ट करवाने की मांग की।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पंजाब के सीएम भगवंत मान का एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान लोकतंत्र के मंदिर पंजाब विधानसभा में शराब पीकर पहुंचे।

‘सरकारी बैठकों में शराब पीकर बैठते हैं भगवंत मान’ : उन्होंने कहा, यह शख्स शराब पीकर मंदिर जाता है, लोकसभा में भी शराब पीकर आता था, सरकारी बैठकों में भी शराब पीकर जाता है और विदेश में तो उसने इतनी शराब पी ली थी कि कथित तौर पर उसे विमान से उतार दिया गया था। शहजाद पूनावाला ने आगे कहा, ‘चुनाव से पहले भगवंत मान ने अपनी मां के सिर पर हाथ रखकर कहा था कि वह फिर कभी शराब नहीं पिएंगे।’

पूनावाला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का डोप टेस्ट की मांग करते हुए कहा, सीएम मान का अल्कोहल टेस्ट किया जाए और दोषी पाए जाने पर उन्हें तत्काल मुख्यमंत्री के पद से हटाया जाए। उन्होंने कहा, पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य का मुख्यमंत्री हर समय नशे में रहता है। नशे की हालत में फाइलों पर हस्ताक्षर करता है।

बीजेपी ने केजरीवाल को भी आड़े हाथों लिया : आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा, अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशा मुक्त करने की बात कही थी, लेकिन शर्मनाक है कि पंजाब में नशा युक्त सीएम ही दे दिया।

क्या है मामला? : शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में उस समय हंगामा हो गया, जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत सभी विधायकों का ब्रेथ एनालाइजर और डोप टेस्ट कराने की मांग उठाई। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर बुलाए गए इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सदन में नशे की हालत में आने का आरोप लगाते हुए सभी विधायकों का बंद कमरे में अल्कोहल टेस्ट कराने की मांग की।

कांग्रेस का कहना था कि सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ सदस्यों के व्यवहार और शारीरिक स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है। वॉकआउट के बाद कांग्रेस के कई विधायक स्पीकर के दफ्तर पहुंच गए और सभी विधायकों का ‘अल्कोमीटर’ टेस्ट कराने की मांग पर अड़ गए, जिससे विधानसभा परिसर में तनाव और बढ़ गया।

सदन के भीतर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष पर कार्यवाही में बाधा डालने और सदन की गरिमा कम करने के आरोप लगे। स्थिति संभालने के लिए स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि इसके विपक्षी दलों ने सदन विधानसभा परिसर में प्रदर्शन भी किया।