जमशेदपुर : ईरान-अमेरिका-इजरायल और खाड़ी देशों में मचे भीषण युद्ध ने भारत में एलजीपी क्राइसिस जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। इस बीच भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। जमशेदपुर के पारडीह निवासी अंश त्रिपाठी ने मौत के साए में भी विचलित हुए बिना अपनी तकनीकी विशेषज्ञता से ‘शिवालिक’ नाम के विशाल मालवाहक जहाज को सुरक्षित भारत पहुंचा दिया। इंडियन ऑयल के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब से 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आना किसी मिशन इम्पॉसिबल से कम नहीं था। 13 मार्च 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) पार कर ये जहाज अब गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है, जिससे देश को बड़ी राहत मिली।
जमशेदपुर के लाल ने पूरा किया मिशन : दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय युद्ध के कारण बारूद के ढेर पर है। कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में 27 सदस्यों की टीम ने इस खतरनाक जोन में एंट्री ली। बतौर सेकंड इंजीनियर, अंश त्रिपाठी के कंधों पर जहाज के तकनीकी संचालन की पूरी जिम्मेदारी थी। 26 नवंबर 2025 से ड्यूटी पर तैनात अंश ने सुनिश्चित किया कि युद्ध वाले हालात और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद जहाज की रफ्तार और सुरक्षा में कोई चूक न हो।
शिवालिक नाम की इस जहाज को यूएई, कतर और सऊदी अरब से एलपीजी लेकर भारत आना था। 13 मार्च को जहाज के सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने की खबर मिलने के बाद अंश के परिवार और परिचितों ने राहत की सांस ली।
परिवार ने काटे डर के साए में दिन : अंश के सुरक्षित लौटने की खबर मिलते ही जमशेदपुर के आशियाना वुडलैंड स्थित उनके घर पर खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। बीते एक हफ्ते से परिवार का अंश से संपर्क पूरी तरह टूट गया था, जिससे माता-पिता और पत्नी अनहोनी की आशंका से डरे हुए थे। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी (सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक, UCIL) और टाटा स्टील में सीए पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी ने बताया कि संपर्क न होने के कारण पूरा परिवार गहरे तनाव में था, लेकिन अब गर्व और राहत महसूस हो रही है।
अंश के घर पर रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लगा है। लोग लगातार फोन कर उनकी कुशलता और सुरक्षित लौटने की जानकारी ले रहे हैं। ये मिशन न केवल व्यक्तिगत साहस का उदाहरण है बल्कि भारत के ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा में अहम योगदान भी साबित हुआ है।
मेधावी छात्र से इंजीनियर तक का सफर : अंश त्रिपाठी का शैक्षणिक करियर हमेशा से शानदार रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और जादूगोड़ा से पूरी की। इसके बाद 2012 में बीआईटी मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड से मरीन इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। साल 2014 से ही वे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अपनी मेहनत के बल पर लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं।
देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम योगदान : अंश त्रिपाठी के लिए ये मिशन सिर्फ एक जहाज की वापसी नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी जीत है। युद्धग्रस्त क्षेत्रों से कच्चे तेल और गैस की सुरक्षित आवाजाही में अंश जैसे जांबाज इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सफलता पर न केवल त्रिपाठी परिवार, बल्कि पूरे जमशेदपुर और देश को गर्व है। वर्तमान में मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डालने के बाद जहाज से गैस वितरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
