चाईबासा : झारखंड पुलिस ने पश्चिम सिंहभूम के कोषागार से पैसे गबन करने के मामले में मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अनुमंडल पुलिस अधिकारी (सदर, चाईबासा) बहमन टुटू ने बताया कि आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
26 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी की पुष्टि : बहमन टुटू ने कहा कि ‘जांच के दौरान चाईबासा कोषागार के माध्यम से पुलिस विभाग के खातों से 26 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी की पुष्टि हुई, जिसके बाद चार लोगों मुख्य आरोपी कांस्टेबल लेखाकार देव नारायण मुर्मू, उसके रिश्तेदार पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका ब्लॉक निवासी सरकार हेंब्रम और अरुण कुमार मर्डी तथा उसके दोस्त ओडिशा के मयूरभंज जिला निवासी गोराचंद मर्डी को गिरफ्तार किया गया है।’
नौ वर्षों तक विभागीय कंप्यूटर डेटा में हेरफेर : उन्होंने बताया कि जांच से पता चला कि आरोपियों ने लगभग नौ वर्षों तक विभागीय कंप्यूटर डेटा में हेरफेर करके सरकारी धन को अपने और अपने सहयोगियों के खातों में अंतरित किया। इस मामले में चाईबासा के कोषागार अधिकारी सुमित कुमार सिंह के बयान के आधार पर मुफस्सिल थाने में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई।
सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने का आरोप : जांच के अनुसार, मुर्मू 2016 से चाईबासा पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की लेखा शाखा में कार्यरत था। इस दौरान, उस पर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने और भुगतान प्रणाली का दुरुपयोग करने का आरोप है। मृत पुलिस कर्मियों के आश्रितों को मुआवजा देने से जुड़े मामलों में वह बैंक खातों की जानकारी बदलकर अपने परिचितों के बैंक खातों का विवरण दर्ज कर देता था। उस पर पुलिसकर्मियों के यात्रा भत्ते को निजी खातों में अंतरित करने का भी आरोप है।
राज्य के कई जिलों में वेतन धोखाधड़ी का मामला : आरोप है कि उसने 2017 से 2025 के बीच 26,21,717 रुपये का गबन किया। इस महीने की शुरुआत में बड़े पैमाने पर वेतन धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें हजारीबाग, बोकारो और रांची के कोषागारों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का पता चला था। इसके बाद कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था। इस घोटाले के मद्देनजर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सभी जिला कोषागारों के ऑडिट का आदेश दिया था।
