झारखंड : रजरप्पा मंदिर परिसर का बदलेगा स्वरूप, अब QR कोड-दानपेटी की होगी सुविधा; हाईकोर्ट का निर्देश

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रांची : झारखंड के प्रसिद्ध रजरप्पा मंदिर परिसर की व्यवस्था और सूरत को पूरी तरह संवारने की तैयारी चल रही है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और रामगढ़ प्रशासन लगातार सीसीएल के साथ मिलकर मंदिर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। रजरप्पा मंदिर कॉरिडोर और विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं के डीपीआर को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसकी कुल राशि 250 से 300 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।

दरअसल, संजीव कुमार सिंह की ओर से रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में आधारभूत संरचना के विकास को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट की ओर से रजरप्पा मंदिर कॉरिडोर को विकसित करने को लेकर पूर्व में ही विस्तृत आदेश दिया गया था। लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने पर याचिकाकर्ता संजीव कुमार सिंह की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। इस याचिका पर बुधवार को न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद और न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

पारदर्शी और डिजिटल दान : सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई रि मंदिर में चढ़ावे और पैसों के हेरफेर को रोकने के लिए जल्द ही दानपेटियां रखी जाएंगी। इसके साथ ही, मंदिर के आधिकारिक बैंक खाते से लिंक ‘क्यूआर कोड ‘ भी लगाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सीधे डिजिटल माध्यम से दान कर सकें।

विकास के लिए बड़ा बजट : मां छिन्नमस्तिका मंदिर के पास बहने वाली दो नदियों भैरवी और दामोदर नदी में उफान के कारण कई घटनाएं भी अक्सर होती है। इस पर भी हाईकोर्ट गंभीर है। ऐसे हादसों के बचाव के लिए हरिद्वार की दर्ज पर सीसीएल की ओर से सीएसआर फंड से 2.92 करोड़ की लागत के बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी के नदी में बहने की स्थिति में थोड़ी दूर स्थित नेट में वो फंस सके और जान बचाई जा सके।

दुकानों का नया ढांचा और सुगम रास्ता : परिसर में लगभग 52 लाख की लागत से 254 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं, जिनका काम 15 जुलाई 2026 तक पूरा हो जाएगा। वहीं दुकानदारों (इंटरवेनर) की ओर से वकील ने तस्वीरें दिखाकर शिकायत की कि दुकानें दोनों तरफ बनने से बीच का रास्ता बहुत संकरा हो गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर 5 या 7 दुकानों के बाद खाली जगह छोड़ी जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने और खरीदारी में आसानी होगी।

श्रद्धालुओं को राहत और सौंदर्यीकरण : धूप से बचाने के लिए कतार वाली जगहों पर शेड नेट लगा दिए गए हैं। साथ ही, मंदिर को और भव्य रूप देने के लिए एक कंसलटेंट फर्म की रिपोर्ट पर्यटन विभाग को भेजी गई है, जिस पर एक हफ्ते में फैसला होना है।

अतिक्रमण और सुरक्षा पर सख्ती : चितरपुर और गोला क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले 249 लोगों को चिह्नित कर नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा, परिसर में हुड़दंग मचाने वाले तत्वों को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

याचिकाकर्ता के वकील ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। कोर्ट ने फिलहाल कोई कड़ा आदेश न देते हुए रामगढ़ डीसी को निर्देश दिया कि वे मंदिर की जमीन के मालिकाना हक और इसके पैसों के प्रबंधन की जांच करें। इन सभी मुद्दों पर अपडेट और नया हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट ने मामले को 4 हफ्ते के लिए टाल दिया है। अब इस केस की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।